Monday, October 24, 2022

कलयुग कब शुरू हुआ और कब खत्म होगा

  

दोस्तो कलयुग आनी कलायुग क्लेश का युग । जिस युग में सभी के मन में यह संतोष हो । सभी मानसिक रूप से दुखी हो। वह युग ही कलयुग है। इस युग में धर्म का सिर्फ एक चौथाई अंशी रह जाता है। कलयुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व हुआ था। श्रीमद्भागवत पुराण और भविष्य पुराण में कलयुग के अंत का वर्णन मिलता है। 

कलयुग कब शुरू हुआ और कब खत्म होगा


युग कितने वर्ष का होता है 

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक युग 100000 वर्ष का होता है जैसे कि सतयुग लगभग 1728000 वर्ष , त्रेता युग 12 लाख 96 हजार वर्ष , द्वापर युग 864000 वर्ष और कलयुग 432000 वर्ष का बताया गया है। कलयुग का प्रारंभ कब हुआ था, इस संबंध में मतभेद है। 


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कलयुग कब शुरू हुआ और कब खत्म होगा

कहते हैं कि युधिष्ठिर के राज्य अभिषेक के बाद कलिकाल का प्रारंभ हुआ था। तो कुछ उनके स्वर्ग में सर शरीर चले जाने के बाद कलिकाल का प्रारंभ हुआ था। राजा परीक्षित से जुड़ी है। कलयुग के प्रारंभ संबंधी घटना कहते हैं कि कलयुग उनके मुकुट में छुपा हुआ था। उसने बाहर निकलकर राजा परीक्षित से जो वार्तालाप की उसका पुराणों में उल्लेख मिलता है। 


आर्यभट के अनुशार महाभारत का युद्ध 3136 ईशा पूर्व को हुआ था। महाभारत युद्ध के 35 वर्ष के पश्चात भगवान कृष्ण ने देह छोड़ दी थी। तभी से कलयुग का आरंभ माना जाता है। भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण के देह छोड़ने के बाद 3102 ईसा पूर्व कलिकाल का प्रारंभ हुआ था। 


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कलयुग कितना ईशा पूर्व में आरंभ हुआ 

कलयुग संबंध के विषय में सबसे प्राचीन संकेत आर्यभट्ट द्वारा दिया गया है। उन्होंने कहा है कि जब वे 23 वर्ष के थे तब कलयुग के 36 वर्ष व्यतीत हो चुके थे अर्थात् वे 476 इसी में उत्पन्न हुए। पश्चात कालीन ज्योतिष शास्त्र ग्रंथों के अनुसार कलयुग संवाद के 3719 वर्षों के उपरांत शव संबंध का आरंभ हुआ। 


मध्यकाल के भारतीय ज्योतिष और ने माना है कि कलयुग एवं कल के प्रारंभ में सभी ग्रह सूर्य एवं चंद्र को मिलाकर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार के सूर्योदय के समय एक साथ एकत्रित थे । अधिकतर विद्वानों के अनुसार कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व में हुआ था। इस मानसिक कलयुग का काल 636007 लंबा चलेगा। 


कलयुग का कोण सा चरण चल रहा है 

अभी कलयुग का प्रथम चरण ही चल रहा है। जिस समय कलयुग का प्रारंभ हुआ उस समय पांचवें ग्रह मंगल बुध, शुक्र बृहस्पति और शनि मेष राशि पर शून्य डिग्री पर हो गए थे। इसका मतलब यह है कि 5122 वर्ष कलयुग के बीच चुके हैं और 400006 882 वर्ष अभी बाकी है। 


श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार सुखदेव जी राजा परीक्षित से कहते हैं। जिस समय सप्तर्षि मघा नक्षत्र में वचन कर रहे थे तब कलिकाल का प्रारंभ हुआ था। कलयुग की आयु देवताओं की वर्ष गणना से 12 सौ वर्ष की अर्थात मनुष्य की गणना अनुसार 432000 वर्ष की है। 


कलयुग का अंत आते आते कैसे करेंगे लोग 

श्री मद्भागवत के द्वादश स्कंध में कलयुग के धर्म के अंतर्गत श्री सुखदेव जी परीक्षण जिसे कहते हैं जो जो घोर कलयुग आ जाएगा क्योंकि उत्तर उत्तर धर्म सत्य पवित्रता, क्षमा दया आयु बल स्मरण शक्ति का रूप होता जाएगा। अर्थात लोगों की आयु भी कम होती जाएगी । 


जब कलिकाल बढ़ता जाएगा। कलयुग के अंत में जिस समय में जिस समय कल्कि अवतार अवतरित होंगे उस समय मनुष्य की परम आयु 20 या 30 वर्ष होगी। जिस समय कल्कि अवतार आएंगे। चारों वर्णों के लोग बोने के समान हो जाएंगे। गाय भी बकरियों की तरह छोटी छोटी और कम दूध देने वाली हो जाएंगी। कलयुग के अंत में संसार की ऐसी दशा होगी अन्न नहीं उगेगा। लोग मछली मासी खाएंगे और भेड़ बकरियों का दूध पिएंगे। 


गाय तो देखना ही बंद हो जाएंगे। होगी तो बकरी समान होगी। एक समय ऐसा आएगा जब जमीन से अनूप अजना बंद हो जाएगा। पेड़ों पर फल नहीं लगेंगे। धीरे-धीरे यह सारी चीजें विलुप्त हो जाएंगी। गाय दूध देना बंद कर देंगे। कलयुग में स्त्रियां कठोर स्वभाव वाली व कड़वा बोलने वाली होगी। पति की आज्ञा नहीं मानेगी जिसके पास धन होगा, उसी के पास स्त्रियां रहेंगे। 


मनुष्य का स्वभाव गधों ज्यादा हो जाएगा। यानी कि केवल पृथ्वी का भार ढोने वाला रह जाएगा। लोग विश्नोई हो जाएंगे। धर्म-कर्म का लोप हो जाएगा। मनुष्य सहित नास्तिक चूर हो जाएंगे। सभी एक दूसरे को लूटने में रहेंगे। कलयुग में सिद्ध हो जाएगा। जो लोग बलवान होंगे, उनका ही राज चलेगा। मानवता नष्ट हो जाएगी। रिश्ते खत्म हो जाएंगे। एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा। जुआ शराब पर स्त्री दमन और हिंसा ही धर्म होगा। 


बहुत समय तक सूखा रहने के बाद कलयुग में अंतिम समय में बहुत मोटी धारा से लगातार वर्षा होगी, जिससे चारों ओर पानी पानी हो जाएगा। समस्त पृथ्वी पर जज हो जाएगा और प्राणियों का अंत हो जाएगा। इसके बाद एक साथ 12 सूर्य उदय होंगे और उनके! तेज से पृथ्वी सूख जाएगी। कलयुग के अंत में भयंकर तूफान और भूकंप ही चला करेंगे। लोग मकानों में नहीं रहेंगे। लोग गड्ढे खोद करेंगे। धरती का तीन हाथ अंश अर्थात लगभग साडे 4 फुट नीचे तक धरती का उपचार अंश नष्ट हो जाएगा ।


और लगातार भूकंप आया करेंगे। अब बात करते हैं कि चारों युग में मनुष्य की लंबाई कितनी थी। सतयुग में मनुष्य की लंबाई 32 फीट अर्थात लगभग 21 हाथ बताई गई है। इस वीक में आ की मात्रा छूने विश्वा अर्थात 0% होती थी और पुण्य की मात्रा 20 विश्वा अर्थात 100% होती थी। त्रेता युग त्रेता युग में मनुष्य की लंबाई 21 फीट अर्थात लगभग 14 हाथ बताई गई है। इस युग में पाप की मात्रा पांच विश्वास 25% होती थी और पुण्य की मात्रा 15 विश्वा अर्थात 75% थी। द्वापर युग द्वापर युग में मनुष्य की लंबाई 11 फीट अर्थात लगभग 7 हाथ बताई गई है। इस युग में आ की मात्रा 10 विश्वा 50% होती थी ।


जबकि पुण्य की मात्रा 10 विश्वा अर्थात 50% थी। पक्के बताया कलयुग कलयुग में मनुष्य की लंबाई 5 फीट 5 इंच अर्थात लगभग 3:30 हाथ बताई गई है। इसमें धर्म का एक चौथाई अंशी रह जाता है। इस युग में पाप की मात्रा अंधा विश्वास अर्थात 75% है, जबकि पुणे की मात्रा 5 विश्वा अर्थात प्रतिशत है। 


दोस्तो आज के लिए इतना ही हमारे ब्लॉग के अंत तक बने रहने के लिए आप सभी लोगो को दिल से धन्यवाद ,,,,,,,,,,,,



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