Thursday, December 1, 2022

Jain dharm ka yogdan । Jain Dharm Ka Prachar


दोस्तो आपने कभी न कभी सड़क पर चलते हुए कुछ ऐसे लोगों को देखे होंगे जिनके शरीर पर कपड़े नहीं थे। क्या आप जानते हैं कि यह लोग कौन हैं और चाहे ठंडी का मौसम हो या गर्मी ये लोग कपडे क्यों नहीं पहनते हैं । आप में से कई लोगों को मालूम होगा कि यह जैन धर्म के लोग होते हैं । 

Jain dharm ka yogdan । Jain Dharm Ka Prachar


लेकिन कई लोगों को यह लगता होगा कि जैन धर्म के सभी लोग निर्वस्त्र होकर जीवन यापन करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है   जैन धर्म के सभी लोग निर्वस्त्र होकर जीवन नहीं जीते हैं तो अब सवाल उठता है कि आखिर यह निर्वस्त्र वाले लोग कौन होते हैं तो आज के पोस्ट में हम आपको इन्हीं लोगों के बारे में बताने जा रहें हैं । 


Jain dharm ka yogdan । Jain Dharm Ka Prachar

दोस्तों जैन धर्म दो भागों में बंटा हुआ है। दिगंबर और श्वेतांबर अशोक के अभिलेखों से यह पता चलता है कि उनके समय में मगध में जैन धर्म का प्रचार था । लगभग इसी समय मठों में बसने वाले जैन मुनियों में यह मत भेज शुरू हुआ कि तीर्थंकरों की मूर्तियां कपड़े पहना कर रखी जाए या नग्न अवस्था में इस बात पर भी मत भेज था कि जैन मुनियों को वस्त्र पहनना चाहिए था या नहीं । 


आगे चलकर यह मतभेद और भी बढ़ गया। पहली सदी में आकर जैन धर्म को मानने वाले मुनि दो दलों में बट गए एक दल श्वेतांबर कहलाया। जिनके साधु सफेद वस्त्र पहनते थे और दूसरा 10 दिगंबर कहलाया जिसके साथ हूं, नग्न बिना कपड़े के ही रहते थे। दोस्तों माना जाता है कि दोनों संप्रदायों में मतभेद सिद्धांतों से ज्यादा चरित्र को लेकर हैं। दिगंबर आचरण पालन में अधिक कठोर हैं, जबकि श्वेतांबर कुछ उधार हैं। 


जैन धर्म के लोग कपड़ा क्यों नहीं पहनते हैं 

श्वेतांबर संप्रदाय के मुनि सफेद वस्त्र पहनते हैं जबकि दिगंबर मुनि निर्वस्त्र रहकर साधना करते हैं। लेकिन सफेद वस्त्र धारण करना है या निर्वस्त्र रहना है। यह नियम केवल मुनियों पर लागू होता है। याम जैन धर्म लोगो के लिए ये नियम नहीं है। दिगंबर में तीन शाखाएं हैं। 


300 साल पहले श्वेतांबर में भी  एक शाखा और निकली जिसे स्थानकवासी कहते हैं। यह लोग मूर्तियों को नहीं पूजते है। जैन धर्म के सभी कथाओं में  थोड़ा बहुत मतभेद होने के बावजूद इस धर्म के सभी लोग महावीर जी की पूजा करने में तथा अहिंसा संयम और अनेकांतवाद में सब का समान विश्वास है। इतनी सारी बातों से आपको यह तो पता चल गया होगा कि जैन धर्म में दिगंबर मुनि निर्वस्त्र रहते हैं। 


लांगा साधु को शर्म नही आता है 

दोस्तों दिगंबर जैन मुनियों का मानना है कि उनके मन और जीवन में खोट नहीं है। इसीलिए उनकी तन पर कपड़े नहीं है। उनका मानना है कि आम लोग कपड़े पहनते हैं, लेकिन दिगंबर मुनि चारों दिशाओं को कपड़ों के रूप में पहन लेते हैं। उनका कहना है दुनिया में नग्नता से बेहतर कोई पोशाक नहीं है। वस्त्र तो विकारों को ढकने के लिए होते हैं जो विकारों से परे हैं। 


ऐसे शिशु और मुनि को वस्त्रों की क्या जरूरत है। इसके अलावा जब दिगंबर मुनि बूढ़े हो जाते हैं और खड़े होकर भोजन नहीं कर पाते हैं तो ऐसे में लोग अन्य जल का त्याग कर देते हैं। आपको बता दें कि इस धर्म में खाना खड़े होकर सेवन करना इस धर्म की खासियत मानी जाती है। मान्यता यी भी है कि इस धर्म के लोग जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां भी नहीं खाते हैं। 


यह केवल उन्हीं सब्जियों का सेवन करते हैं जो जमीन के ऊपर उगती है। साथ ही दिगंबर जैन मुनि दीक्षा के लिए वस्त्रों का पुन त्याग कर देते हैं । दिन में एक ही बार सुध जल और भोजन का सेवन करते हैं ।  सर्दी में भी ओढ़ने बिछाने के कपड़ों का त्याग का पालन किया जाता है। जैन धर्म में दीक्षा का अर्थ है समस्त कामनाओं की समाप्ति और आत्मा को परमात्मा बनाने के मार्ग पर चलना । 


जैन धर्म और बौद्ध धर्म में क्या अंतर है 

दोस्तों, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में बहुत से समानता है। किंतु अब यह साबित हो चुका है कि बौद्ध धर्म की तुलना में जैन धर्म अधिक प्राचीन है। जैनों का मानना है कि हमारी 24 तीर्थंकर हो चुके हैं । जिनके द्वारा जैन धर्म की उत्पत्ति और विकास हुआ। जैन धर्म में तब की बहुत महिमा है। उपवास को भी एक तप के रूप में देखा गया है। 


कोई भी मनुष्य बिना ध्यान, अनशन और तप किए बिना अंदर से शुद्ध नहीं हो सकता। यदि वह स्वयं की आत्मा की मुक्ति चाहता है। तो उसे ध्यान अनशन और तप करना ही होगा। महावीर ने पूर्ण अहिंसा पर जोर दिया है और तब से ही अहिंसा परमो धर्म जैन धर्म ही इंपोर्टेंट सिद्धांत माना जाने लगा। जैन धर्म के लोग अधिकांश व्यापारी वर्ग के हैं। जैन धर्म का प्रचार सब लोगों के बीच नहीं हुआ ।


क्योंकि इसके नियम कठिन थे। मास मछली और अंडे खाने पर जैन आपत्ति रखता है क्योंकि जैन धर्म अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित है। 


तो उम्मीद करता हू की ये आप समझ गए होगे की जैन धर्म के लोग का प्रचार क्या है । आज के लिए इतना ही हमारे ब्लॉग के अंत तक बने रहने के लिए आप सभी लोगो को दिल से धन्यवाद ,,,,,,,,,,,,,,



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