Saturday, November 19, 2022

पैरा कमांडो की ट्रेनिंग कैसे होती है।

दोस्तो तो एक बार फिर से स्वागत है। आपका Technical prithvi में एशियन पैरा कमांडो ट्रेनिंग दोस्तों किसी भी देश की ताकत उस देश में मौजूद सेना के हिसाब से तय की जाती है। क्योंकि अगर देश में मौजूद सैनिक ताकतवर है। तो एक साथ दुश्मन सेना के कई सारे सैनिकों को ढेर करने में एक पल भी नहीं लगाएंगे

पैरा कमांडो की ट्रेनिंग कैसी होती है।
और इसी वजह से हर देश यह चाहता है। कि उसके सैनिक दुनिया में सबसे बेहतर बनेगी इसके लिए उन्हें कड़ी से कड़ी ट्रेनिंग करवाई जाती है। और हमारी आज की इस post में मैंने आपका दोस्त prayag kumar ऐसी कड़ी ट्रेनिंग के बारे में बताने वाला हूं। जिनके बारे में सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी तो दोस्तों बिना देर के चलिए शुरू करते हैं। यह हैरतअंगेज पोस्ट लेकिन पोस्ट शुरू करने से पहले एक छोटी सी रिक्वेस्ट है पोस्ट के नीचे रेड कलर का सब्सक्राइब बटन दिख रहा होगा उस पर क्लिक करके सब्सक्राइब करें। ताकि आपको पोस्ट मिले सबसे पहले


पैरा कमांडो की ट्रेंनिंग में क्या - क्या होती है।

306 शिक्षक ट्रेनिंग कैंप पैरा कमांडो सबसे पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि पैरा कमांडो का चयन किस तरीके से जिस तरीके से नहीं चल जाता बल्कि इसका चयन सेना में मौजूद विभिन्न रेजीमेंट्स में से किया जाता है। जिसके बाद इन्हें आज की ट्रेनिंग के लिए पैरा कमांडो ट्रेनिंग जहां इन जवानों को 3 से 6 महीने की बेसिक ट्रेनिंग के बाद 36 घंटों की ट्रेनिंग करनी होती है।


पैरा कमांडो की ट्रेडिंग कब कब शुरू होती है।

 ईमान की ट्रेनिंग बहुत ही ज्यादा भयानक होती है। लेकिन जो जवान 36 घंटे की ट्रेनिंग पूरा कर लेते हैं। उन्हें ही अपने सर पर पैरा कमांडो की टोपी और शोल्डर पर मैच लगाने को मिलता है। 36 घंटे की ड्रेस ट्रेनिंग की शुरुआत रात के समय में होती है। जहां जब जवान नींद के आगोश में बस में सोने जाने वाला ही होता है। तभी उन्हें लाइन में खड़ा होने का आदेश मिलता है।


पैरा कमांडो कितने घंटे सोते है।

 1 हफ्ते से एक या 2 घंटे की नींद ही नसीब हुई होती है। ऐसे में इनके लिए होने के बावजूद इस तरह की ट्रेनिंग करना बहुत कठिन है। दोस्तों इस ट्रेनिंग में जवानों को बार-बार रूटीन एक्सरसाइज करना होता है। जब तक कोई एक हार ना मानने और पैरा जवानों को 30 किलो के नाटक लोड के साथ अगले 2 घंटे तक खड़ी पहाड़ी पर चढ़ाई करनी है। हम आपको बताना चाहेंगे कि रास्ता 10 किलोमीटर का होता है। जिसे 2 घंटे में पूरा करना होता है।


 क्योंकि इसमें अपने साथी कमांडो को अपने कंधे पर बैठा कर चलना होता है। जो सबसे ज्यादा जरूरी होता है। क्योंकि अगर कहीं किसी परिस्थिति में साथी को चोट लग जाए तो कमांडो धोखा होने के बावजूद उसे मुश्किल घड़ी से बचाकर ला सके और इसी चीज के लिए इन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती है। और उसके बाद इन जवानों को एक 8 किलोमीटर के सर्किट की राउंड लगाने होते इसके बाद हर एक राउंड में वजन को बढ़ा दिया जाता है।


 सबसे पहले पैरा जवानों को अपने 30 किलो के बैटल रोड और हथियार के साथ हुई इस बीच ट्विटर के जरिए लेकर राउंड लगाना होता है। जबकि दूसरे राउंड में 60 से 50 किलो के ट्रक के टायर के साथ चक्कर लगाना होता है। और तीसरे राउंड में भारी-भरकम लकड़ी को उठाकर चक्कर लगाना होता है।


 और दोस्तों इन सभी राम को पार करने के लिए इन्हें सिर्फ 1 घंटे का होता है हम आपको बताना चाहेंगे संगी की ट्रेनिंग के इस हिस्से को वॉशिंग कहा जाता है। और जब जवान से पूरा कर लेते हैं। बर्फ में हाथ पैर बांधकर डाल दिया जाता है। बड़ी पानी बरस से भी ज्यादा ठंडा होता है। यानी कि आप इनकी हालत समझ सकते हैं। कि बिना सोए नहीं इतना भारी भरकम लोड उठाकर दौड़ना पड़ा और फिर दिन भर से भी ठंडे पानी में डाल देना शरीर के साथ पूरी तरह से डांसर है।


 लेकिन जब तक कोई जवान इस तरह की चीजें नहीं सहेगा तो वह हमारे देश की रक्षा के लिए कहीं से भी सही नहीं रहेगा बारिश टैंक में जाने के बाद फ्री नौजवानों को उतनी ऑक्सीजन लेने देता है। जितनी लेकर वह जिंदा रहेगा कि वह इनका लगभग कमी निकाल देता है। और यह सब कुछ भविष्य के लिए किया जाता है। पैरा कमांडो के सामने किसी भी तरह की स्थिति कभी भी आ सकती है।


 जिससे उन्हें कड़ा मुकाबला करना ही होगा पर दोस्तों ट्रेंनिंग के दौरान जो भी जवान की कहीं भी हल्की सी जॉब कर जाता है। तो उसका पैरा कमांडो बनने का सपना चकनाचूर हो जाता है। अभी तो ट्रेनिंग बस शुरू हुई है। क्योंकि इतना होते होते 14 घंटे का समय बीत चुका होता है।


 और इनकी परीक्षा कड़ी होती चली जाती है। मेरे गटर के पानी की तरह दिखने वाले एक जूस को दिया जाता है। जिसके और जब यह सभी चीजें पूरी हो जाती है। उनकी ऑब्जरवेशन यानी की चीजों को ध्यान से समझने की ताकत की जांच हो बड़ी काम बहुत ही ज्यादा दबाव से भरा हुआ होता है। जहां आपको सोचने के लिए समय तो मिलता है।


पैरा कमांडो ट्रेंनिंग में क्या लिखना होता है।

 लेकिन उसमें आप को फोकस करने के लिए शांति नहीं मिलती हालांकि इस टेस्ट में जवानों को उन चीजों के बारे में लिखना होता है। इन चीजों को उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान एक्सपीरियंस किया है और जब यह सभी चीजें पूरी हो जाती है तो जवानों का मेडिकल टेस्ट किया जाता है यह जानने के लिए कि किसके शरीर में इतनी जल्दी हार मान ली क्योंकि पहले यह जवान मानसिक रूप से आगे बढ़ने के लिए तैयार हूं।


 लेकिन उसका शारीरिक रूप से तैयार होना भी बहुत जरूरी है और इसमें सफल हो जाते हैं और 10 किलोमीटर अभी 10 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो जाती है तो 20 घंटे से भूखे इन जवानों को रूखा सूखा खाना दिया जाता है। जिस्म की भूख मिट जाए के बाद कई जवानों को नींद आ जाती है। क्योंकि पूरे दिन की थकान के बाद जमीने हल्का सा भी आराम का वक्त मिलता है। तो उनकी आंख लग जाती है। वहीं बनेगा पैरा कमांडो बनने का सपना टूट जाता है।


 और जो जवान जगह होते हैं उन्हें 5 घंटे के लिए जंगल में छोड़ दिया जाता है इस दौरान उनके कमबख्त दिल की जांच की जाती है और जो जवान इसमें सफल हो जाते हैं उन्हें कीचड़ में उतार दिया जाता है जहां उन्हें कीचड़ से सने कपड़ों में हथियारों के साथ दौड़ लगानी होती है। और इसी के साथ इन जवानों की 36 घंटे की ड्रेस ट्रेनिंग समाप्त होती है इसे सफल करने वाले जवानों के सर पर मेहरून कैसे सजा दी जाती है और वह प्रॉपर तरीके से पैरा कमांडो बन जाते हैं।


 तो दोस्तों देखा आपने एक मैरून के अवसर पर सजना किसी भी जवान के लिए कितनी बड़ी बात होती है। और यह सब तभी होता है। जब वह इतने महीनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बिना सोए 36 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग करता है। और जिस जवानी ट्रेनिंग पूरी कर दी हो वाकई में किसी से भी टक्कर लेने के लिए तैयार है।


 बाकी आपको इनकी ट्रेनिंग के बारे में सुनकर कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा और ऐसे इंटरेस्टिंग पोस्ट लगातार देखने के लिए हमारे वेबसाइट को सब्सक्राइब करना और हम फिर मिलेंगे नहीं पोस्ट में तब तक के लिए जय हिंद जय भारत

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