Tuesday, November 29, 2022

गर्व में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की । गर्भ में पुत्र या पुत्री

गर्व में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की ये आखिर तय कैसे होता है। कैसे एक छोटे से अंश से एक पूरे जीवन का निर्माण होता है। प्रेगनेंसी से जुड़े ऐसे कई सवाल हर किसी के मन मे होते है। और लोग इन सवालों का जबाब जानने के लिए अक्सर Internet की खाग छानते रहते है। लेकिन कही भी इन सवालों का सही जबाब नही मिलते है। आपको आज के पोस्ट में हम आपके इन्ही सभी सवालों का जबाब देने वाले है। 

गर्व में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की । गर्भ में पुत्र या पुत्री


ये पोस्ट हर युवा को जरूर पढ़ना चाहिए। क्योंकि आज के समय मे युवाओं को सही जानकारी देना ही हमारा मकसद है। तो पोस्ट को पूरा पढ़िए। ओर जानिए बच्चे के जनरल से लेकर sex ling तक पूरी प्रोसेस । 

Pregnancy full information


गर्व में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की 

माँ बनाना हर औरत के जिंदगी के सबसे हसीन पल होता है। जब माँ के शरीर में एक छोटा सा अंश बनता है। और एक नए जीवन के रुप में आकार लेता है। पूरे 9 महीने माँ अपने बच्चे को अपने खोख मे रखती है। और जिस तरह माँ की खोख में बच्चे का विकाश होता है। ये पूरी प्रोसेस अपने आप मे कुदरत का करिश्मा ही है। 


इन 9 महीनों में ही बच्चे का सारे अंगों का विकाश होता है। दिमाग बनता है। और ling का निर्धारण होता है। कुदरत ने पूरी प्रोसेस को इस तरह से डिजाइन किया है। कि इसमें कही भी गलती का कोई गुंजाइश नही है। माँ के पेट मे पलने वाले भ्रूण का विकाश लड़के के होगा। या फिर लड़की के रूप में ये पूरी तरह fixx प्रोसेस है। 


इसे कोई change नही कर सकता है। लेकिन बच्चे का पूरा शरीर एक तरह से deplap होता है। फिर लिंग अलग - अलग कैसे हो जाते है। चलिये जानेंगे । सबसे पहले ये जानते है। कि वो कोंन से रीजन है। जिसका वजह से गर्व में लड़का है। या लड़की होने का निर्धारण होता है। 


1 महीने में माँ के पेट मे बच्चा कितना बड़ा होता है? 

आम तौर पर किसी महिला को एक महीने बाद प्रेगनेंसी के अहसास होता है। तब तक शरीर मे भ्रूण बन चुका होता है। जिसका आकर 6 मिली मीटर आणि मटर के दाने से भी आधा होता है। लेकिन तब ही उसकी रीड की हड्डी को पहचान जा सकता है। इसी समय हाथ और पर भी बनने लगते है। लेकिन अभी तक भ्रूण की संरचना इसे होती है। कि उसका विकाश male या female किसी भी रूप में हो सकता है। 


            गर्भ में पुत्र या पुत्री

हालकि की इस वक्त का ling निर्धारित नही होता ऐसा 7 वे से 12 सप्ताह के बीच होता है। इस दौरान अगर भ्रूण के ex चोरोमो deplap करता है। तो लड़की पैदा होती है। वही अगर ये ex y बनते है। तो लड़का पैदा होता है। महिला के egg में 30 पेयर होते है।


         बच्चा कैसे पैदा होता है? 

 ex चोरोजों ओर पुरुष के स्पर्म में 30 पेयर होते है। x ओर y चोरोजों जब egg ओर स्पर्म आपस मे मिलते है। तो भ्रूम का निर्माण होता है। और कोशिकाओं का विकाश होता है। जब महिला के x चोरोजों पुरुष का Y चोरोजों से मिलता है। तो लड़के का भ्रूम बनता है। 


ओर जब महिला के X चोरोजों से पुरुष का मिलता है। तो लड़की का भ्रूण बनता है। यहाँ आप ये जानकारी गोर से पढ़िए। यहाँ ये बात अलग है। कि महिला के पास केवल X x चोरोजों होते है। ओर पुरूष के पास x ओर Y चोरोजों दोनों भी होते है। लेकिन ये पूरी प्रोसेस इतनी सिंपल नही होते है। 


जितनी नजर आती है। इस पूरी प्रोसेस में जीन्स हॉर्मोन , ओर दूसरे कई fects भी improtnet रोल play करते है। खाश तोर पे Teston ओर extra डियमों नाम के हॉर्मोन की बड़ी भूमिका होती है। चलिये इस प्रोसेस को थोड़ा और details में समझते है। 


         बच्चा कैसे पैदा होता है

जब एक male ओर female आपस मे संबंध बनाते है। तो male के स्पर्म ओर महिला के egg को मिलने से बच्चा बनाना शुरू हो जाती है। egg में स्पर्म आने के बाद 7 से 8 दिन में भ्रूण गर्व वस्य में आकर सतह पर आकर चिपक जाता है। जिसे प्रत्य लोपन plants कहाँ जाता है। 


इस दौरान महिला को हालकि bliding या sproting भी हो सकती है। जो नार्मल है। गर्व गर्व वासय में ही अपने विकसित होने का पूरा सफर तय कर जन्म लेता है। 6 या 7 वे हप्ते तक भ्रूण की लम्बाई 1 सेंटीमीटर हो जाती है। अभी तक ये भ्रूम ना male है। या ना female है। भ्रूण का male के रूप में विकाश तब शुरू होता है। 


जब testet आणि की testeted का निर्माण होता है। tested बनाते है। male अंगों का विकाश के लिए हॉर्मोन भी अहम है। इस हॉर्मोन के साथ भी कुछ fected होते है। जिनसे male parts जैसे कि वाश डिफरेंट का निर्माण होता है। 


इसी के साथ - साथ लिंग का भी विकाश होता रहता है। इसी तरह भ्रूण female का रूप में तब deplap होता है। जब Ovary यानी कि overy का विकाश होता है। यहाँ से एक्स्ट्रा डीएड हॉर्मोन नाम के हिसाब होता है। लड़को के शरीर मे विकाश में जो भूमिका testron होती है। 

गर्व में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की । गर्भ में पुत्र या पुत्री


लड़कियों में भी वही भूमिका एक्स्ट्रा द्यायलोड आता है। ऐसी हॉर्मोन के चलते फिलिपीएनन तुलुलत गर्व वासय में खून का विकाश होता है। साथ ही क्लिटोरिया ओर उनिथों का भी निर्माण होता है। अगर लड़के और लड़की के बीच भ्रूण की तुलना करें। तो पत्ता चलता है। कि शुरुआत में दोनों ही अंदर से बिल्कुल एक जैसे होते है। 


गर्व में लड़का है। या लड़की कैसे पता चलता है। 

उस वक्त कोई नहीं बता सकता है। कि भ्रूण लड़के का है। या लड़की का लेकिन फिर समय बीतने के बाद ये भ्रूण लड़के या लड़की किसी के भी रूप में deplap हो सकता है। और ये डिपेंड करता है। jin ओर हॉर्मोन पर ओर कब एक बार ling का निर्धारण हो जाता है। तो इसके बाद बच्चा लड़का या लड़की के रूप में ही विकसित होता है। 


ओर अगर प्रेगनेंसी में कोई प्रॉब्लम ना आये। तो माँ एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है। लेकिन हर बार अब कुछ नॉर्मल नही होता है। कई बार बच्चे की विकास के इस प्रोसेस में कुछ प्रॉब्लम आ जाती है। जैसे कि Androgen , Insensitivity , Syndrome , भ्रूण के inter sex यानी थर्ड जेंडर के रूप में पैदा होने का ये सबसे बड़ा कारण है।

गर्व में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की । गर्भ में पुत्र या पुत्री


शुरुवात में सब कुछ वैसे ही चलता है। जैसे लड़को का विकाश होता है। एक X ओर एक Y चोरोजों teated का विकास लेकिन जनरंगो में ऐसे खराबी होती है। की वो इस हॉर्मोन के संदेश को समझ नही पाते । ऐसे में हॉर्मोन अधिक प्रभाव से काली हो जाता है।


   बच्चा मादा के रूप में क्यो पैदा होता है? 

नतीजा X ओर Y चोरोजों होने के बाबजूद भ्रूण का विकाश मादा के रूप में होता है। सिर्फ थर्ड जेंडर या inter सेक्स कहा जाता है। तो आप समझ गए होंगे। 


की थर्ड जेंडर किसी अविष्कार के वजह से पैदा नही होता बल्कि एक diffect है। क्योकि प्रेगनेंसी के दौरान हो सकता है। और इसमे ना तो माँ की कोई गलती है। ना ही बच्चे की अब आता है। वो वक्त जब बच्चा अपने 9 महीने की जिंदगी पूरी करके दुनिया मव सांस लेता है। यानी डिलीवरी के टाइम जब बच्चा दुनिया मे आने के लिए तैयार हो जाता है। 


तब वो धीरे - धीरे नीचे आने लगता है। जन्म के समय सामान्यता शिशु का सिर पहले बाहर आता है। जब माँ अपने बच्चे को देखती है। तो वो दर्द भी खुशी में बदल जाता है। जो उसने बच्चे को पैदा करने मव सहा था। महिला के गर्व धारण से लेकर शिशु के दुनिया में आने की यात्रा अनूठी ओर कई तरह के अनुभव लिए होते है। 


यदि महिला स्वास्थ्य है। तो नार्मल डिलीवरी की संभवना अधिक रहती है। कई बार महिलायें घर वालो के दवाओं में आकर लड़के के चाहत में जेंडर test करवाती है। वैसे तो ये गेर कानूनी है। और नाही कानून का इतिहास है। और नही मानवता के लिहाज से ये सही कदम है। 


बेटा हो या बेटी दोनों ही भगवान का रूप है। और हमे कोई हक नही है। कि हम प्रकृति के साथ खेलवाड़ करे। वही कई लोग बेटी होने के लिए माँ को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन ऐसा नही है। लड़की होगी। या लड़का इसके लिए male के चोरोजों का जिमेदार होता है। 


 हम फिर वही कहेंगे। कि जेंडर टेस्ट का मानव वीरता है। और हम कभी इसको support नही कर सकते है। आपका इस बारे में क्या ख्याल है। हमे comment box में जरूर बताये। ओर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। ताकि ये जानकारी पूरी भारतवर्ष में फेल जाए। 


कल फिर मिलंगे एक ओर दिलचस्प पोस्ट के साथ तब तक हमारे blogg को अंत तक बने रहने के लिए आप सभी लोगो का दिल से धन्यवाद ,,,,,,

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