Tuesday, October 11, 2022

राजू हाथी की कहानी?Raju elephant full story


 दोस्तो तो एक बार फिर से स्वागत है। आपका technical prithvi में दोस्तो तो आज के इस पोस्ट्स में एक ऐसी हाथी की कहानी बताने जा रहा हूं। जिसे सुनने के बाद आपका दिल पिघल जाएगा।

राजू हाथी की कहानी

 आप लोगों ने इस दुनिया में कई सारी दर्दनाक कहानियां सुनी होंगी लेकिन आज हम आपको एक ऐसे हाथी की दर्दनाक कहानी सुनाने वाले हैं। इसे सुनने के बाद आपकी आंखों में भी आंसू आ जाएंगे क्योंकि यह कहानी वाकई में दिल को दहला देगी आज हम आपको राजू नाम के ऐसे हाथी के बारे में बताएंगे जिसके जीवन में बचपन से ही दर्द और तकलीफ लिखी हुई थी

 अंत में उसके साथ कुछ ऐसा हुआ कि उसकी पूरी जिंदगी बदल गई तो फिर क्या थी राजू की कहानी चली आज मैं या नहीं आपका दोस्त prayag kumar आपको अपनी इस पोस्ट में बताता हूं बस पोस्ट के बिल्कुल अंत तक चुपके रहिएगा क्योंकि पोस्ट वाकई में आपको भी उसी तरह रुला देगी जिस तरह राजू हाथी रोया था चलिए पोस्ट को शुरू करते हैं।

 लेकिन हां पोस्ट शुरू करने से पहले एक छोटी सी रिक्वेस्ट है पोस्ट के नीचे लाल कलर का सब्सक्राइब बटन दिख रहा होगा उस पर क्लिक करके सब्सक्राइब करें ताकि आपको मिले पोस्ट सबसे पहले

दोस्तो हम सभी जानते हैं। कि हाथी एक सोशलाइज्ड जानवर है। जो बाकी हाथियों के साथ मिलजुल कर रहते हैं। परी माना जाता है कि हाथी काफी ज्यादा समझदार होते हैं। इस बात का नमूना आपको कई सारी पोस्ट में देखने को मिल जाएगा जिसमें कहीं कोई हाथी पेंटिंग करता है। तो कहीं कोई इंसानों के साथ खेलने लगता है।

 एसएम इनकी समझदारी से हम इंसान बहुत अच्छे से वाकिफ है पर एक चीज है जिससे हम वाकिफ नहीं है और वह है इंसानों से जी हां हम इंसान ऐसे जीवित प्राणी है जिनमें अकल तो सबसे ज्यादा है लेकिन दरिंदगी उससे भी ज्यादा है पर इंसान दरिंदगी की किस हद तक जा सकता है इसका उदाहरण तो आप आजकल आज तो दुनिया में देख  रहे हैं।

 जैसे कि इंसान जानवरों से भी बदतर हो चला है। और यहां भी ठीक ऐसा ही हुआ क्योंकि दोस्तों जिस हाथी की कहानी हम बताने जा रहे हैं।उसका नाम राजू है। इसका जन्म पता नहीं कहां हुआ लेकिन जन्म के तुरंत बाद ही इसे चोरी कर लिया गया चोरी करने के बाद से भेज दिया गया जो यह तो राजू की तकलीफ होगी बस शुरुआत भर थी

 लेकिन इसे कई जगह पर खरीदा और बेचा गया जिस वजह से यह किसी एक जगह पर कभी रहा ही नहीं पाया जहां हर कोई से फायदे और नुकसान के तराजू में तोल कर देता था जिस वजह से राजू का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन बिगड़ता चला गया बिजनौर से बिजनौर खरीदे जाने के बाद अंत में राजू उत्तर प्रदेश के एक मालिक के पास आया

 जब राजू के इसके मालिक ने खरीदा था तो राजू की हालत बहुत ज्यादा खराब थी जाओ बहुत कमजोर हो गया था इसी वजह से इसे मालिक ने राजू को बहुत ही कम पैसों में खरीद लिया और इनसे राजू की किस्मत और ज्यादा खराब हो गई इसका ही मालिक नशे का आदी था जो नशा करके आता और राजू को मारने लगता

 राजू एक बेजुबान जानवर होने के नाते राजू अपने मालिक को कुछ भी नहीं कह पाता था जो कि राजू पहले से ही बहुत कमजोर था और उसका मालिक उसे मारने के साथ-साथ ना ही ठीक ढंग से पौष्टिक आहार देता ना उसे सही से रखता जिस वजह से राजू की हालत और ज्यादा खराब हो गई। और तो मजबूरन अपने मालिक की मार सहनी पड़ती थी हालांकि राजू का मालिक सिर्फ उसे मारता ही नहीं था बल्कि उससे पैसे भी कमाता था 

राजू को भीड़ वाली जगह पर ले जाता ताकि लोग उसे देखकर चंद पैसे दे दे यार उसके रात के नशे का इंतजाम हो जाए धीरे-धीरे ऐसे ही समय बीतता चला गया और राजू इलाके में काफी ज्यादा फेमस हो गया जहां लोग राजू से काफी ज्यादा आकर्षित होकर उसकी सवारी करते हैं दिल खोलकर पैसे लुटाते जिस वजह से राजू के मालिक की आमदनी बढ़ती गई लेकिन इतनी मेहनत करने के बाद भी राजू को कुछ नहीं मिलता ना ही अपने मालिक का प्यार नहीं ठीक ढंग का खाना इसी वजह से राजू की हालत और ज्यादा बिगड़ने लगी राजू का स्वास्थ्य पहले से ही खराब था

 लेकिन दिन भर काम का कुछ आने की वजह से राजू और सदा बीमार रहने लगा और दोस्तों यह सब देखने के बाद उसके मालिक का दिल नहीं पसीजा और उसे राजू पर जरा सी भी दया नहीं आई उसने राजू को घर के पीछे लोहे की मोटी कांटे वाली जंजीर से बांधकर अकेला छोड़ दिया था तो राजू इसी तरह कई सालों तक बंधक बना रहा जाओ से खाने के नाम पर दिन भर में एक बार थोड़ा बहुत कुछ मिल जाता था जिससे उसका पेट भी नहीं भरता था

 क्योंकि उसका पेट भी नहीं बताता क्योंकि जब वह चलता था तब तो उसके मालिक ने उसे ठीक ढंग का खाना दिया नहीं था तो अब उसके बीमार होने के बाद उसने राजू पर और ज्यादा ध्यान देना छोड़ दिया उल्टा जब भी वह नशा करके घर लौटता तो बिना वजह राजू को मारने लगता लेकिन इतनी सारी तकलीफ है सहने के बाद अब राजू के अच्छे दिन आने वाले थे

कैसेकि 2013 को एक वाइल्डलाइफ चैरिटी को राजू की हालत के बारे में पता चला इसके बाद राजू लोगों की नजरों में आया और जब लोगों ने राजू कि इसे रुला देने वाली स्थिति को देखा तो सभी की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि उसकी हालत को देखकर कोई भी आंख बंद करके कह सकता था कि से सालों से पेट भर खाना नसीब नहीं हुआ है। हालांकि 2013 को ही उसका इलाज चैरिटी ने राजू को रेस्क्यू करने की अपील कोर्ट से की लेकिन कोर्ट में इस बात का फैसला आने में 1 साल लग गया मुझे कोर्ट का फैसला आया तो कार्तिक सत्यनारायण जी के नेतृत्व में उनकी टीम ने राजू के ऑपरेशन को शुरू किया

 जहां ऑपरेशन रात के अंधेरे में किया गया कोई किसी को ज्यादा इस बारे में पता ना चले और जब राजू को आजाद करने के लिए उसके पैरों में बंद ही लो ही की कांटेदार जंजीरों को हटाया जा रहा था तो वहां पर काफी ज्यादा घाव बन गया था राजू ने खुशी खुशी जी लिया लेकिन रेस्क्यू करने के बाद जब राजू को खाना मिला तो पहली बार इतने दिनों बाद पेट भर खाना खाने की वजह से खुशी से राजू की आंखों में आंसू आ गए 

नीलम हां बहुत ही ज्यादा भावुक था क्योंकि इस तरह की जिंदगी जीने के बाद राजू आज पहली बार अपनों के बीच खड़ा हुआ महसूस कर रहा था उसकी परवाह कर रहे थे और इस तरह के लोग इतने सालों में राजू ने पहली बार देखी थी शायद इसी वजह से इस बेजुबान जानवर की आंखें नम होने से खुद को रोक नहीं पाए तो दोस्तों आपका इस बी जुबान जानवर की कहानी के बारे में क्या कहना है।

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