Thursday, November 10, 2022

कामख्या देवी का रहस्य बताएं

 कामख्या देवी  के मंदिर में होते हैं एक से बढ़कर एक चमत्कार बलि देने के बाद भी नहीं जाती यहां जानवरों की जान नही जाती है।दोस्तो तो आपकी जानकारी के लिए बता दें 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है।

कामख्या देवी का रहस्य बताएं

कामख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। और ऐसे लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है।कामख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है।


 इस मंदिर में देवी दुर्गा मां अंबे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं रही बल्कि मंदिर में कौन बना है। जो कि हमेशा फूलों से ढका रहता है। कुंज से हमेशा ही जल निकलता रहता है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है। और वहां के यहां होने से माता यहां राजस्वाला भी होते हैं।


 दोस्तो आपने बिल्कुल सही सुना मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है। कि शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि भगवान शिव का मां सती के प्रति मोहभंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के क्या बंधा किए थे जहां पर यह भाग्य है। वहां पर माता का 1 शक्तिपीठ बन गया और इससे काफी माता की होनी गिरी थी जो आज बहुत ही शक्तिशाली पीठ है।


 वैसे तो यहां साल भर में भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन दुर्गा पूजा चौहान दिया दुर्गा दे बसंती पूजा मदन देवासी मनसा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है। जिसके कारण अफसरों पर दिन में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। और मेला के दौरान पास में स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी 3 दिन के लिए लाल हो जाता है।ओर ऐसा कहा जाता है।


 पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। फिर 3 दिन बाद दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ते हैं। आपको बता दें कि मंदिर में भक्तों को बहुत ही अजीबोगरीब प्रसाद दिया जाता है। दूसरी शक्तिपीठों की अपेक्षा कामाख्या देवी मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गिला कपड़ा दिया जाता है। कहा जाता है। कि मां को 3 दिन का राजा 16 होता है। तो सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है।


 3 दिन बाद से मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं। तब वह वस्त्र माता के राज से लाल रंग से भी कम होता है। इस कपड़े को अंबुबाची वस्त्र कैसे हैं। और इसे ही भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। और दोस्तों आप बता दे मनोकामना पूरी करने के लिए यहां कन्या पूजन व भंडारा कराया जाता है। इसके साथ ही यहां पर पशुओं की बलि भी दी जाती है। लेकिन यहां मादर जानवरों की बलि नहीं दी जाती है। काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या माता तांत्रिकों के सबसे महत्वपूर्ण देवी हैं।


 कामाख्या देवी की पूजा भगवान शिव के नववधू के रूप में की जाती है। क्योंकि मुफ्ती को स्वीकार करती हैं। और सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। आपको बता दें कि मंदिर परिषद में जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर आता है। उसके हर मुराद पूरी होती है। मंदिर के साथ लग एक मंदिर में आपको मां की मूर्ति विराजत मिलेगी जिसे कामख्या देवी मंदिर कहा जाता है।


 माना जाता है। कि यहां के तांत्रिक बुरी शक्तियों को दूर करने में भी समर्थ होते हैं। होते हैं कि वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल काफी सोच विचार करते हैं। कामाख्या के तांत्रिक और साधु चमत्कार करने में सक्षम होते हैं। कई लोग बच्चे धन और दूसरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कामाख्या की तीर्थ यात्रा पर भी जाते हैं। कामाख्या मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है। पहला हिस्सा सबसे बड़ा है। इसमें हर व्यक्ति को नहीं जाने दिया जाता वहीं दूसरे हिस्से में माता का दर्शन होता है।


 जो एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है। माने साहब नहीं कि महीने के 3 दिन माता को रजस्वला होता है। इन 3 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहते हैं। 3 दिन बाद दोबारा बड़े ही धूमधाम से मंदिर के पट खोले जाते हैं। किस जगह को तंत्र साधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण से कमाना चाहता है। यहां पर साधु और अघोरियों का ताता लगा रहता है। एक मात्रा में काला जादू किया जाता है।


 अगर कोई व्यक्ति काला जादू तू यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है। तो दोस्तों अगर आपको भी कामाख्या देवी की विशेषताएं अच्छी लगी तो हमें कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं आने वाली नई पोस्ट की नोटिफिकेशन आपको मिले सबसे पहले तो दोस्तो चलते है।फिर मिलेंगे नई पोस्ट के साथ तब तक के लिए जय हिंद जय भारत

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