Thursday, December 8, 2022

भगवान जगन्नाथ क्यों होते हैं हर साल बीमार?

 

दोस्तों जैसे कि हम सभी को यह अच्छी तरह याद है कि कलयुग शुरू हो चुका है क्योंकि जिस तरह से पापी लोगों का वास देश दुनिया में बढ़ता जा रहा है, वैसे ही विनाश और सर्वनाश का समय भी काफी नजदीक आ चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा। कोरोनावायरस काल जिस में पापियों के साथ अच्छे लोगों के मरने का संकेत रहा है। 

भगवान जगन्नाथ क्यों होते हैं हर साल बीमार?


हमारे देश में एक ऐसा मंदिर भी है जो विनाश के संकेत हमें दे चुका है और विनाश के बाद क्या होगा, इसकी भविष्यवाणी भी हो चुकी है जो कि समय रहते पूरी तरह सही होती भी जा रही है तो दोस्तों बात असल में यह है कि 16 वीं सदी के संत अच्युतानंद दास ने 500 वर्ष पहले कलयुग के अंत महाविनाश और उसके बाद नए युग की कई भविष्यवाणियां की है। 


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वर्तमान में उनके द्वारा लिखी पुस्तक भविष्य मालिका की भविष्यवाणियां वायरल हो रही है जिसमें यह बताया गया है कि जिस दिन जगन्नाथ मंदिर में निम्नलिखित घटनाएं घटेगा ।  तो समझ लेना कि कलयुग का अंत हो गया है और अब महाविनाश प्रारंभ होगा तो आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या संकेत दिया है। 


भगवान जगन्नाथ क्यों होते हैं हर साल बीमार?

जब भगवान जगन्नाथ का अपमान होगा। मंदिर की परंपराओं में व्यवस्था होगी। जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष नमक लीवर की रस्म होती है। इसमें पुरानी मूर्तियों को बदलकर नई मूर्तियां स्थापित की जाती है कहते हैं की 1996 के बाद 2015 में इस रस्म को लेकर पुजारियों में झगड़ा हो गया था । जिसकी वजह से यह रस्म देरी से हुई । उड़ीसा में कई लोग इसे भगवान जगन्नाथ के अपमान और परंपराओं को खंडित करने के तौर पर देखते हैं। इसके बाद यहां की अव्यवस्था सभी के सामने उजागर हुई है। 


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गुंबद के पत्थर 

जगन्नाथ पुरी मंदिर के गुंबद से नीचे पत्थर गिरेंगे। कहते हैं कि वह 1842 से लेकर अब तक लगभग 15 से 16 बार जगन्नाथपुरी से पत्थर गिरने की घटना हो चुकी है। 


बरगद का पेड़ 

उड़ीसा में चक्रवाती तूफान से जगन्नाथ मंदिर का कल्पवृक्ष यानी पवित्र बरगद का पेड़ गिर जाएगा और इसके बाद दुनिया में लाखो लोग मरने लगेंगे । उड़ीसा में मई 2019 में फानी नाम का एक तूफान आया था जिसमें यह बरगद का पेड़ गिर गया था। इसके बाद 19 के अंत में कोरोना महामारी का प्रकोप प्रारंभ हुआ था और लोगों के मरने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। 


ध्वज का गिरना 

जगन्नाथ मंदिर का झंडा कई बार गिरेगा और एक चक्रवाती तूफान के कारण झंडा समुद्र में जा गिरेगा मई 2019 में चक्रवाती तूफान पानी के कारण यह घटना घट चुकी है। इसके बाद मई 2020 में भी यह घटना घट चुकी है। 


निलचक्र का टेढ़ा होना 

जगन्नाथ मंदिर का नीलचक्र यानी सुधर्शन चक्र तूफान से टेढ़ा हो जाएगा। मई 2019 में समुद्री तूफान पानी के कारण यह विशालकाय चक्र टेढ़ा हो गया था। 


ध्वज का जलना

जगन्नाथ पुरी के मंदिर के धवज में आग लग जाएगी। 19 मार्च 2020 को पाप नाशक एकादशी के दिन मंदिर के परिसर में महादीप लगाया गया था। अचानक हवा चलने से ध्वज उड़कर महाद्वीप के पास चलाया और उसमें आग लग गई। उस समय इसे बहुत बड़ा अनिष्ट मारा गया था। उसके 5 दिन बाद देश में पहला लॉक डाउन लग गया था। इसके बाद ही भारत में दूसरी लहर का ऐसा मंत्र देखा गया जिसने त्राहि मचा दी थी। चारों तरफ चिताएं जल रही थी। 


त्रिदेव के वस्त्र 

मंदिर परिसर में त्रिदेव के ऊपर जो कपड़ा है, उसमें आग लग जाएगी। मंदिर परिसर में यह घटना भी कई बार हो चुकी है। 


गिद्ध का गुंबद पर बैठना 

मंदिर के शिखर पर और एक अशोक स्तंभ पर गिद्ध बैठेगा। कहते हैं कि जगन्नाथ मंदिर के शिखर के आस पास कभी भी किसी पक्षी को उड़ता नहीं देखा।  और ना ही इसके आसपास कोई प्लेन या हेलीकॉप्टर उड़ाया जाता है ।  लेकिन मंदिर के उपर जुलाई 2020 के बाद दिसंबर 2021 में गिद्ध चील और बाज दिखाई दिए । मंदिर के शिखर ध्वज एक अशोक अस्थम और निलचक्र  पर यह पक्षी बैठे हुए दिखाई दिए थे। 


रक्त के धब्बे 

जगन्नाथ मंदिर में बार-बार रक्तपात होगा। खून के धब्बे मिलेंगे। यह घटना भी घट चुकी है ।  मंदिर परिसर में बार-बार खून के धब्बे मिल रहे हैं। कभी झगड़ों के कारण तो कभी किसी अन्य रहस्यमई वजह के चलते खून के धब्बे देखे गए। कई बार मंदिर का शुद्धीकरण करके वहां अनुष्ठान किया गया है। उपरोक्त सभी भविष्यवाणियां सत्य हो गई है। इसका मतलब यह है कि कलयुग का अंत आ चुका है और विनाश का समय अब प्रारंभ होगा। 


इस कलयुग में कोन बचेगा  

भगवान शंकर और भगवान विष्णु के जो अनन्य भक्त और उपासक होंगे इस विनाश से वही बचे रहेंगे। जो भगवान महादेव जी और नारायण के सच्चे निस्ट और अन्य सेवक होंगे उन्हें भक्तों को बचाने और उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी भगवान कल्कि की होगी। 


भगवान कल्कि स्वयं और हनुमान जी सहित भगवान महादेव जी और नारायण के भक्तों की सबसे पहले रक्षा करते हुए उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर पहाड़ी इलाकों में जैसे कि उत्तर भारत में उत्तराखंड और दक्षिण भारत में पर्वतीय मालाओं या उड़ीसा के आसपास के कुछ ब्राह्मण स्थान पर भेज देंगे। ऐसे 74000 मुख्य भक्तों को जो पूर्व जन्म में महाभारत काल में थे । 


भगवान रक्षित करेंगे और इस युग में भी सेवा कर रहे हैं। अन्य भक्तों की रक्षा करेगें । भारत की 25% आबादी  ही तक जीवित बचेंगे ।  लगभग 33 करोड लोग ही इस विनाश से बच पाएंगे। यदि ऐसा होता भी है तो भी केवल साधक और उपासक की जीवित रह पाएंगे जो भक्त होंगे और अधिक से अधिक तप करने वाले होंगे। वही जीवित बचेंगे। 


जिनकी रक्षा का दायित्व भगवान कल्कि का होगा। बाकी सब सांसारिक लोग मारे जाएंगे। सब के परिवार और कुल समाप्त हो जाएंगे। जो लोग पृथ्वी पर जीवित रह जाएंगे। फिर सभी सतयुग में प्रवेश करेंगे। इसीलिए भक्तों और उपासिकों का हर हाल में भला होगा और अधर्म यों को काल देवता निकल जाएंगे। संपूर्ण विश्व की 82% जनसंख्या नष्ट हो जाएगी। 


तो दर्शको उम्मीद करता हूं की ये जानकारी आपको अच्छा लगा होगा । हमारे ब्लॉग के साथ अंत तक बने रहने के लिए आप सभी लोगो को दिल से धन्यवाद ,,,,,,,,,,,,



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