Thursday, October 6, 2022

चाँद पर जाने से क्यों डरता है अमरीका

 दोस्तो मानो चांद पर कदम रख चुका है। किंतु मानोगे चांद पर रखे कदम काफी हैरानी भरे रहे हैं। आज से 50 वर्ष पूर्व जब हमारे भारी-भरकम टेलीविजन सेट वर्तमान में हमारी जेब में रखे स्मार्टफोन से भी कम फीचर रख देते तकनीकी रूप से इंसानों का ज्ञान भी हद ही सीमित था

चाँद पर जाने से क्यों डरता है अमरीका

वर्ष 1969 में नासा लगातार दो बार चाँद पर पहुचा है। एक बार जुलाई में और दूसरी बार नवंबर में पहली बार में नासा का कोई सामान चांद पर छूट गया हो जिसे लेने सिर्फ 4 महीने बाद ही नासा ने दोबारा इंसानों को चांद पर पहुंचा दिया सिर्फ यही नहीं वर्ष 1972 आते-आते मात्र 4 सालों के अंतर पर नासा ने लगातार छह बार इंसानों को चांद पर भेज कर इतिहास रच दिया इतनी जल्दी-जल्दी चांद पर जाने के कारण पूरे विश्व के वैज्ञानिकों की आंखों में चमक आ गई


चांद पर मानव बस्तियां बसाने की या वहां खनन करने की बातें होने लगी लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि चांद पर जाने की चाहत विश्व के सभी देशों ने एकदम से त्याग दी आ जाता है। कि नील आर्मस्ट्रांग और बजे ड्रिंक चंद्रमा किस डे पर घूम रहे थे तब कुछ समय के लिए उनका प्रसारण जानबूझकर रोक दिया गया था


कुछ कहना चाहते थे लेकिन उनकी आवाज भी काट दी गई थी जानकारों का कहना है कि चांद पर अनेकों टावर है जिनकी ऊंचाई 2000 से ढाई हजार मीटर तक है अर्जुन और एडरीने किसी ऐसे ही टावर को देखा था यह जानकारी आमजन से छुपाई गई यह टावर एलियंस ने कई हजार साल पहले पृथ्वी पर नजर रखने के लिए बनाए थे फिलहाल यह टावर वीरान पड़े हैं।


इन टावर के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए ही नासा ने जल्दी-जल्दी इंसानों को चांद पर भेजा लेकिन जब आखिरी बार इंसान चांद पर गया तो वहां एलियंस आदम के और उन्होंने इंसानों को वहां से चले जाने की चेतावनी दे दी हाथी कभी वापस ना आने के लिए भी कह दिया नील आर्मस्ट्रांग ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि अंतरिक्ष में उनके यान का पीछा किसी बेहद एडवांस टेक्नोलॉजी वाले युवकों द्वारा किया गया था।


चांद पर अजीबो गरीब रहस्य में संगीत बजने की आवाज को भी कई चंद्र यात्रियों ने सुना है। हालांकि नासा ने कभी इस बारे में अधिकारिक बयान जारी नहीं किया इंसान पर देख कई यात्रियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि चांद पर एलियंस आते रहते हैं और चांद पर एलियंस का अपना बेस भी है एक चाँद पर काम करने वालों का कहना है कि चांद अंदर से खोखला है क्योंकि चांद की सतह के नीचे एलियंस ने अपना अड्डा बनाया हुआ है।


अब सच्चाई चाहे जो भी हो लेकिन एलियंस होते हैं इस बात से कोई इनकार नहीं किया जा सकता चांद पर वापस लौटने में कोई ना कोई समस्या तो जरूर है क्योंकि आज से 50 साल पहले अगर हम चांद पर पहुंच जाने में सक्षम हो चुके थे तो अब तक तो हमने विज्ञान में बेहद अधिक तरक्की कर ली है तब तो मनुष्य को चांद पर अपनी कॉलोनी बनाकर खनन आदि का काम शुरू कर देना चाहिए था।


बेहद ही आश्चर्य की बात है कि यदि हम साठ के दशक में चांद पर पहुंच गए थे तो हमें वह वापस जाने में इतना समय क्यों लग रहा है पिछले साल नेशनल स्पेस काउंसिल की बैठक में नासा के प्रवक्ता ने कहा था कि इंसान को दोबारा फिर से चांद पर भेजा जाएगा इस की तैयारी करने में अभी समय लगेगा शायद हम 2028 तक चांद पर फिर से पहुंच जाएंगे उनका यह बयान सवाल खड़े करता है। जब हम दशकों पहले कई बार लगातार चांद पर जा चुके हैं तो अब इतना लंबा वक्त क्यों चाहिए विज्ञान पहले की तुलना में आगे बढ़ा है या पीछे हटा है दोस्तों का अमेरिका के नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर अपना पैर रखने वाले पहले पृथ्वी वासी थे


जुलाई 1969 को भारतीय समय अनुसार सुबह 8:26 पर चांद पर उतरे प्ले पड़ा है कि बड़े अंतरिक्ष यान कोलंबिया से अलग होकर ईगल नामक एक छोटा यान चंद्रमा पर उतरा था सबसे पहले नील आर्मस्ट्रांग ही बाहर निकले किंतु नील आर्मस्ट्रांग के चांद पर कदम रखने से पहले ही इंसानों की कोई और निशानी चांद पर मौजूद थे


खुद के उतरने से पहले आर्मस्ट्रांग ने काट मारकर बांधी हुई प्लास्टिक की थैली चंद्रमा पर फेंकी थी स्टील में आर्मस्ट्रांग और उनके शहर यात्रियों का मल मूत्र और उड़ान के दौरान कि खाने-पीने की सामग्री उसे बचा हुआ कचरा था देखा जाए तो इंसानों से पहले इंसानों की पूरी ने चांद पर अपनी उपस्थिति दर्शाई थी ऑल स्टोन की थैली फेंकने से करीब 10 साल पहले लूना टू नामक रूसी यान चांद से टकराकर ध्वस्त हो गया था


लाल का पचरा भी चांद पर चारों ओर बिखरा पड़ा होगा संभव है यह कूड़ा आज भी ज्यों का त्यों ही पड़ा होगा चांद पर कोई वातावरण नहीं है ना ही वहां बारिश होती है इसलिए सारा कूड़ा बिना सड़े गले आज भी वैसे का वैसा ही पड़ा होगा रूसी यान के नष्ट होने से लेकर आज तक हम लगातार चांद पर कूड़ा फैला रहे हैं। नासा का अनुमान है कि चंद्रमा पर भले ही कोई नहीं रहता पर वहां 190 टन मनुष्य निर्मित कचरा यहां वह बिखरा पड़ा है।


अगर चाँद के कूड़े को इकट्ठा किया जाए तो करीब 10 बड़े ट्रकों की आवश्यकता पड़ेगी वहीं दूसरी तरफ नासा कह रहा है। कि चाँद पर किसी प्रकार का जीवन नहीं पनप सकता चाँद के किसी रानी और बंजर जमीन है ऐसा कोई कारण नहीं है जिसके बल पर कहा जा सके कि चांद पर जा ना मानो के लिए हितकारी है


वजह है कि नासा का चांद से मुंह बंद हो गया है तो फिर नासा हमें बताएं कि अमेरिका और बाकी देश लगातार चांद पर यान क्यों भेज रहे हैं जब वहां जाना बेकार है और विज्ञान इको का चांद से मोहभंग हो चुका है तो क्यों चांद पर लगातार पूरा फैलाया जा रहा है आखिर बंजर चांद पर ऐसा कौन सा राज है जिसे जाने के लिए हम समय-समय पर चांद पर यान भेज दे रहे हैं


दोस्तों इसमें कोई शक नहीं कि चाँद का धरातल बेहद ही रहस्यमई है माना जाता है कि अतीत में किसी अंतरिक्ष दिन के टकराने से धरती के दो टुकड़े हो गए थे इन दोनों टुकड़ों में से एक छोटे टुकड़े को ही आज हम चंद्रमा के नाम से जानते हैं जनी चांद धरती के बाद बना है और चांद और पृथ्वी का धरातल भी एक समान ही होना चाहिए


 लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार चांद धरती से भी ज्यादा पुराना पिंड है जब चंद्रमा की मिट्टी से मिले तत्वों की जांच की गई तो इसे अंदाज अन 530 करोड़ साल पुराना माना गया जबकि हमारी धरती में 450 करोड़ साल पुरानी है चांद का धरातल में पृथ्वी की तुलना में अलग है 20 नवंबर 1969 को जब अपोलो मिशन के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने एक लूनर मॉडल को चांद पर छोड़ा तो उस मॉडल के टकराने से चाँद पर भूकंप जैसी स्थिति बन गई थी


चांद की धरती करीब 1 घंटे तक किसी घंटे के समान कंपन और आवाज करती रही थी ऐसा तभी संभव है जब चांद की सतह किसी धातु से बनी हो और अंदर से चांद खोखला को चांद पर पाए जाने वाले पत्थरों में भी भारी मात्रा में यूरेनियम और नेपच्यूनियम जैसे एलिमेंट पाए गए हैं।


एलिमेंट कम से कम पत्थरों में तो नहीं पाए जाते इन एलिमेंट्स का प्रयोग स्पेसशिप की बारिश ने पर किया जाता है ताकि स्पेसशिप अधिक तापमान और दबाव को सह सके तो क्या चांद भी एक स्पेसशिप ही है माना जाता है कि चंद्रमा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के क्षेत्र से भी बाहर है फिर भी वह लगातार पृथ्वी की परिक्रमा किए जा रहा है।


जिस कारण अनेकों वैज्ञानिकों का दावा है कि चंद्रमा प्राकृतिक है ही नहीं बल्कि इसे कृत्रिम रूप से किसी बुद्धिमान एलियन सभ्यता द्वारा बनाया गया है चंद्रमा के जरिए ही हो एलियन सभ्यता पृथ्वी पर नजर रखती है इतिहास की किताबों में चंद्रमा के बारे में और अनोखा तथ्य भी पढ़ने को मिलता है।


कहाँ जाता है कि आज से करीब 910 साल पहले यानी 11 वीं सदी में चंद्रमा अचानक से गायब हो गया था चांद कई महीनों तक लगातार गायब रहा और उसके बाद दोबारा प्रकट हो गया जो कि उस जमाने में अंधविश्वास अपने चरम पर था इसलिए सभी लोगों को लगा कर चांद के गायब होने के कारण कोई ना कोई अनहोनी घटना जरूर होगी


सभी धर्मों ने बड़े पैमाने पर पूजा पाठ की जब महीनों बाद चंद्रमा वापस दिखाई पड़ा तो लोगों ने राहत की सांस ली चांद के यूं अचानक गायब होने के कारण ही सभी धर्मों में चंद्रमा का बेहद ही महत्वपूर्ण स्थान है हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि 1104 में आइसलैंड में स्थित एक ज्वालामुखी में भयंकर विस्फोट हुआ था उसे विस्फोट से भारी मात्रा में राख निकल कर आसमान में फैल गई थी


इस कांड चंद्रमा दिखाई नहीं देता था किंतु यदि ऐसा हुआ होता तो महीनों तक शैली वह रात सिर्फ चंद्रमा की रोशनी को ही नहीं बल्कि सूरज की रोशनी को भी प्रभावित करती सूरज की रोशनी और गर्मी पृथ्वी पर ना पहुंच पाने के कारण ही पृथ्वी पर शीतयुद्ध शुरू हो जाता और करोड़ों जीव मारे जाते


 लेकिन इस तरह से पृथ्वी पर जिओ के मरने की कोई घटना इतिहास में दर्ज नहीं है दोस्तों इसमें कोई शक नहीं कि चंद्रमा ने अपने राज्यों की ओर सदैव इंसानों का ध्यान खींच रखा है इन्हीं रहस्य को समझने इंसान कई बार चांद पर भी गया लेकिन चांद पर इंसानों को भेजने के मिशन को पिछले 50 सालों से रोजाना भी अपने आप में बेहद ही रहे।


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